जबलपुर के सांसद — 1952 से 2024
सात दशकों की लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व यात्रा — वे जनप्रतिनिधि जिन्होंने संसद में जबलपुर की आवाज़ और आकांक्षाओं को पहुँचाया।
जबलपुर लोकसभा: सभी सांसद
| वर्ष | सांसद | पार्टी | लोकसभा |
|---|---|---|---|
| 1952 | श्री सुशील कुमार पटेरिया | INC | 1st जबलपुर उत्तर |
| 1952 | श्री मंगरु गणु उइके | INC | 1st मंडला-जबलपुर दक्षिण |
| 1957–1971 | श्री सेठ गोविंद दास | INC | 2nd–5th (4 Terms) |
| 1974 (By-election) | श्री शरद यादव | BLD | 5th |
| 1977 | श्री शरद यादव | Janata Dal | 6th |
| 1980-1982 | श्री मुंदर शर्मा | INC-I | 7th |
| 1982, 1989, 1996, 1998 | श्री बाबूराव परांजपे | BJP | 7th, 9th, 11th, 12th |
| 1991 | श्री श्रवण कुमार पटेल | INC | 10th |
| 1999 | श्रीमती जयश्री बनर्जी | BJP | 13th |
| 2004, 2009, 2014, 2019 | श्री राकेश सिंह | BJP | 14th–17th (4 Terms) |
| 2024–Present | श्री आशीष दुबे | BJP | 18th (Current) |
सांसद - 2024
2024 से वर्तमान (वर्तमान सांसद)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
आयु: 55 वर्ष, वाणिज्य स्नातक, कृषक पृष्ठभूमि।
पार्टी संगठन में समर्पित कार्यकर्ता – भाजपा प्रदेश मंत्री रहे।
जबलपुर में जमीनी स्तर पर भाजपा गतिविधियों में सक्रिय।
2024 लोकसभा चुनाव भारी बहुमत से विजयी (~7.90 लाख वोट, 68% वोट शेयर, ~4.86 लाख अंतर)।
पूर्व सांसदों की प्रोफ़ाइल
व्यावसायिक प्रोफाइल:
स्वतंत्र भारत की प्रथम लोकसभा (1952) में जबलपुर उत्तर सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित।
यह दौर पोस्ट-इंडिपेंडेंस था, जब जबलपुर क्षेत्र बहु-सदस्यीय था।
वे एक प्रमुख स्थानीय नेता थे, जिनका परिवार जबलपुर में प्रभावशाली रहा।
संसद में प्रारंभिक विकास, क्षेत्रीय मुद्दों पर योगदान दिया।
(प्रथम लोकसभा, बहु-सदस्यीय क्षेत्र से मंडला-जबलपुर दक्षिण)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: 5 नवंबर 1901, वधोना गांव, चंदा जिला (वर्तमान महाराष्ट्र); मृत्यु: 5 मई 1984।
एक प्रमुख आदिवासी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता तथा राजनीतिज्ञ।
आदिवासी उत्थान एवं कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया।
1918-1943 तक बंगाल नागपुर रेलवे में कार्य किया।
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के सचिव रहे।
प्रथम लोकसभा (1952) में मंडला-जबलपुर दक्षिण से निर्वाचित; उसके बाद 1957, 1962, 1967 तथा 1971 में मंडला से लगातार पाँच बार सांसद चुने गए।
आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक न्याय पर फोकस।
पद्म श्री से सम्मानित।
उनके पुत्र वसंत राव उइके भी मध्य प्रदेश में मंत्री एवं विधायक रहे।
(दूसरी से पाँचवीं लोकसभा तक लगातार)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: 16 अक्टूबर 1896, जबलपुर (प्रसिद्ध महेश्वरी व्यापारी परिवार – राजा गोकुलदास परिवार से)।
स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी – महात्मा गांधी जी के निकट सहयोगी; असहयोग, सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आंदोलनों में भाग लिया; कई बार जेल गए (दमोह जेल में नाटक लिखे जैसे प्रकाश, कर्तव्य आदि)।
1920 के दशक से कांग्रेस में शामिल; महाकौशल क्षेत्र से काउंसिल ऑफ स्टेट में प्रतिनिधित्व (1923)।
संविधान सभा सदस्य के रूप में गाय संरक्षण, राष्ट्रीय भाषा (हिंदी) तथा राष्ट्रगान पर बहस में योगदान।
स्वतंत्रता के बाद जबलपुर से निरंतर सांसद चुने गए – 1957, 1962, 1967 तथा 1971 में विजयी।
लोकसभा में हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने के प्रबल समर्थक; गौहत्या निषेध, सांस्कृतिक संरक्षण, जैन समुदाय के मुद्दे तथा साहित्य संवर्धन पर फोकस।
1961 में पद्म भूषण से सम्मानित।
18 जून 1974 तक सांसद रहे – जबलपुर के प्रारंभिक दौर के सबसे प्रभावशाली एवं दीर्घकालिक सांसद। उनकी विरासत आज भी क्षेत्र में सम्मानित है।
1974 (उप-निर्वाचन)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: 1 जुलाई 1947, होशंगाबाद (म.प्र.) के किसान परिवार में।
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडलिस्ट।
छात्र जीवन से समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया से प्रेरित होकर सक्रिय।
1974 में मात्र 27 वर्ष की आयु में सेठ गोविंद दास की मृत्यु के बाद जबलपुर उप-निर्वाचन में भारतीय लोक दल (विपक्षी) से कांग्रेस को हराकर संसद पहुंचे।
1975 की आपातकाल के बाद 1977 में जनता पार्टी की लहर में जबलपुर से पुनः निर्वाचित।
बाद में राजनीतिक यात्रा बिहार/उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित – कई लोकसभा कार्यकाल (1989, 1991, 1996, 1999, 2009), राज्यसभा सदस्य (1986, 2004), केंद्रीय मंत्री (संचार, नागरिक उड्डयन आदि), जनता दल के संस्थापक एवं नेता।
जबलपुर उनका प्रारंभिक ब्रेकथ्रू था, जिसने उन्हें राष्ट्रीय विपक्षी नेता बनाया।
1980 (सातवीं लोकसभा)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
1980 के लोकसभा चुनाव में जबलपुर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा गुट) के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित।
एकल कार्यकाल के दौरान स्थानीय विकास, रोजगार तथा क्षेत्रीय मुद्दों (जबलपुर की रक्षा एवं औद्योगिक इकाइयों) पर योगदान दिया।
1982 (उप-निर्वाचन), 1989, 1996, 1998 (कई कार्यकाल)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: 23 सितंबर 1922; मृत्यु: 1999।
जबलपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता।
स्वतंत्रता के बाद स्थानीय राजनीति में प्रवेश – 1957 से 1974 तक जबलपुर नगर निगम पार्षद; 1974-75 में महापौर।
जनसंघ/भाजपा के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका – 1982 उप-निर्वाचन में सातवीं लोकसभा के लिए जबलपुर से निर्वाचित।
1984 में चुनाव हारे, किंतु 1989 (नौवीं), 1996 (ग्यारहवीं) तथा 1998 (बारहवीं) लोकसभा में विजयी।
राम जन्मभूमि आंदोलन काल में सक्रिय।
जमीनी स्तर पर संगठनकर्ता एवं पार्टी निर्माता; 1999 तक जबलपुर में भाजपा का मजबूत चेहरा बने रहे।
क्षेत्र में स्थानीय विकास तथा सांस्कृतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
1991 (दसवीं लोकसभा)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: परमानंदभाई पटेल जी के पुत्र।
1991 के लोकसभा चुनाव में जबलपुर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित।
लोकसभा में क्षेत्रीय विकास, बिड़ी उद्योग तथा स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रहे।
1991-96 के कार्यकाल में संसदीय बहसों में भाग लिया।
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: 2 जुलाई 1938, इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज), उत्तर प्रदेश।
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता।
मध्य प्रदेश विधानसभा में 1977 (जबलपुर सेंट्रल, जनता पार्टी से), 1990 तथा 1993 (पश्चिम जबलपुर) से निर्वाचित।
1977-1980 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं।
1999 में जबलपुर लोकसभा से भाजपा उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित (13वीं लोकसभा, 1999-2004)।
भाजपा के जबलपुर में मजबूत आधार बनाने में योगदान।
2004 से 2019 तक (चार लगातार कार्यकाल)
व्यावसायिक प्रोफाइल:
जन्म: 4 जून 1962, जबलपुर।
राजनीतिक यात्रा विश्वविद्यालय दिनों से प्रारंभ – 1979-80 में साइंस काउंसिल प्रतिनिधि।
1990 के दशक में भाजपा जिला स्तर पर सक्रिय; 2000 से जबलपुर भाजपा अध्यक्ष।
2004 में पहली बार जबलपुर लोकसभा जीते।
उसके बाद 2009, 2014 तथा 2019 में पुनः निर्वाचित।
2016 में लोकसभा में भाजपा मुख्य सचेतक बने।
वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री।