मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
पूरे मध्य प्रदेश के लिए न्याय का मुख्य केंद्र — जबलपुर का उच्च न्यायालय 1936 से कानून के शासन को बनाए हुए है, जो इस शहर को राज्य की ‘न्यायिक राजधानी’ का गौरव दिलाता है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य की सर्वोच्च अदालत का मुख्य केंद्र (मुख्य पीठ) है, जो जबलपुर में स्थित है। साल 1936 में नागपुर उच्च न्यायालय के रूप में स्थापित इस कोर्ट को 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के रूप में पुनर्गठित किया गया था।
पूरे मध्य प्रदेश पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले इस न्यायालय की मुख्य पीठ जबलपुर में होने के साथ-साथ इंदौर और ग्वालियर में दो खंडपीठ भी काम कर रही हैं। यही वजह है कि जबलपुर को मध्य प्रदेश की निर्विवाद न्यायिक राजधानी कहा जाता है।
उच्च न्यायालय जबलपुर में एक बहुत बड़ा कानूनी, प्रशासनिक और व्यावसायिक तंत्र (इकोसिस्टम) तैयार करता है, जिससे हजारों वकीलों, कानूनी जानकारों, कोर्ट स्टाफ और इससे जुड़े अन्य सेवा उद्योगों को संबल मिलता है।
न्यायालय: एक नजर में
जबलपुर का न्यायिक ताना-बाना
जबलपुर में उच्च न्यायालय की मौजूदगी ने पिछले करीब 90 सालों से शहर की पहचान, अर्थव्यवस्था और यहां के कामकाजी माहौल को एक खास आकार दिया है। यह पूरे राज्य से वकीलों, न्याय चाहने वाले पक्षकारों, न्यायाधीशों और कानून के जानकारों को यहां आकर्षित करता है।
- हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से हजारों पंजीकृत अधिवक्ता जुड़े हुए हैं
- कानूनी सेवाओं का फलता-फूलता बाजार — चैंबर्स, नोटरी और दस्तावेज तैयार करने वाले केंद्र
- सहयोगी संस्थान: धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (कुलाधिपति: मुख्य न्यायाधीश)
- कोर्ट से जुड़ी अर्थव्यवस्था: होटल, परिवहन, प्रिंटिंग और अन्य सहायक सेवाएं
- बड़ा सरकारी प्रशासनिक ढांचा — रजिस्ट्री ऑफिस और सहायक स्टाफ
- जबलपुर में नागरिकों के लिए नियमित रूप से लोक अदालतों और कानूनी सहायता शिविरों का आयोजन